नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला भारत! स्टार्टअप क्रांति ने कैसे बदली युवाओं की तस्वीर?

एक समय था जब भारत के ज्यादातर युवा सरकारी या निजी नौकरी पाने का सपना देखते थे। परिवार का लक्ष्य भी यही होता था कि बेटा या बेटी किसी अच्छी नौकरी में लग जाए। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है। अब देश में ऐसे हजारों युवा हैं जो खुद का कारोबार शुरू कर रहे हैं और दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं।
यही वजह है कि आज जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनने की चर्चा हो रही है।
आखिर क्या है यह बदलाव?
भारत में 2016 में स्टार्टअप इंडिया पहल शुरू की गई। इसका उद्देश्य था कि नए बिजनेस शुरू करने वाले युवाओं को पहचान, सहायता और बेहतर माहौल मिले।
पहले स्थिति यह थी कि नया कारोबार शुरू करना आसान नहीं था। बैंक से फंडिंग मिलना मुश्किल था, निवेशक कम थे और स्टार्टअप को लेकर लोगों का भरोसा भी सीमित था। कई परिवारों में बिजनेस शुरू करना जोखिम भरा फैसला माना जाता था।
लेकिन धीरे-धीरे माहौल बदला। सरकार की नीतियों, डिजिटल क्रांति, इंटरनेट की पहुंच और निवेशकों की बढ़ती रुचि ने युवाओं को नए अवसर दिए।
भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
आज भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल है। देश में 1.5 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप मौजूद हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। 100 से अधिक यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य वाली कंपनियां) भी भारत में बन चुकी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अब स्टार्टअप सिर्फ दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु तक सीमित नहीं हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा भी नए-नए आइडिया लेकर आगे आ रहे हैं। देश के आधे से अधिक स्टार्टअप छोटे शहरों से निकल रहे हैं।
रोजगार पैदा करने में स्टार्टअप्स की बड़ी भूमिका
जब कोई नया कारोबार शुरू होता है तो सिर्फ एक व्यक्ति को फायदा नहीं होता। उसे कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है, सेवाओं की जरूरत पड़ती है और एक पूरा आर्थिक तंत्र तैयार होता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप लाखों प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा कर चुके हैं। हाल के वर्षों में यह संख्या 17 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार तक पहुंच चुकी है।
यानी जो युवा कभी नौकरी की तलाश में थे, आज वे खुद लोगों को नौकरी देने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अवसर बन रहे हैं?
आज स्टार्टअप सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं हैं। कई सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं
एग्रीटेक (कृषि तकनीक)
हेल्थटेक
फिनटेक
एडटेक
ई-कॉमर्स
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
ग्रीन एनर्जी
लॉजिस्टिक्स
मैन्युफैक्चरिंग
गांव और छोटे शहरों के युवाओं के लिए भी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बिजनेस शुरू करना पहले से काफी आसान हो गया है।
क्या हर स्टार्टअप सफल होता है?
नहीं।
यह समझना जरूरी है कि स्टार्टअप की दुनिया में जोखिम भी होता है। कई स्टार्टअप सफल होते हैं तो कई बंद भी हो जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अधिक स्टार्टअप बनने से नवाचार बढ़ता है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलती है।
यही कारण है कि विकसित देशों की तरह भारत भी उद्यमिता (Entrepreneurship) को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।
छोटे शहरों के युवाओं के लिए बड़ा मौका
आज इंटरनेट, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने कारोबार शुरू करने की लागत कम कर दी है।
अगर आपके पास अच्छा आइडिया है तो जरूरी नहीं कि आप बड़े शहर में ही हों। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के युवा भी ऑनलाइन बिजनेस, कृषि आधारित स्टार्टअप, डिजिटल सेवाएं और स्थानीय उत्पादों के जरिए सफल उद्यमी बन रहे हैं।
जरिए सफल उद्यमी बन रहे हैं।
जब नए कारोबार बढ़ते हैं तो:
नए रोजगार पैदा होते हैं
टैक्स संग्रह बढ़ता है
निवेश आकर्षित होता है
स्थानीय उद्योग मजबूत होते हैं
निर्यात बढ़ता है
GDP को गति मिलती है
इसी वजह से स्टार्टअप इकोसिस्टम को भारत की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण इंजन माना जा रहा है।
भारत के युवाओं की पहचान तेजी से बदल रही है। पहले जहां सफलता का मतलब सिर्फ नौकरी पाना माना जाता था, वहीं अब बड़ी संख्या में युवा खुद का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी बना रहे हैं।





