बिहार में दादा-परदादा की जमीन का पुराना केवाला (रजिस्ट्री डीड) ऑनलाइन कैसे निकालें? पूरी जानकारी

अगर आपके दादा, परदादा या परिवार के किसी पुराने सदस्य के नाम जमीन थी और उसका केवाला (Registry Deed) या रजिस्ट्री का कागज घर में नहीं मिल रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आज बिहार सरकार ने कई पुराने भूमि अभिलेखों को डिजिटल रूप में उपलब्ध करा दिया है। ऐसे में अगर रिकॉर्ड स्कैन हो चुका है, तो आप घर बैठे ऑनलाइन उसकी प्रमाणित कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।

A man in a blue blazer pointing towards an image of a 'Kewala' (land deed) document and a download icon, with text in Hindi overlaying the background indicating a guide on how to download old land deed documents online with one click.
Learn how to easily download your old ‘Kewala’ (land deed) documents online with just one click.

इस लेख में आसान भाषा में समझेंगे कि पुरानी रजिस्ट्री की नकल कैसे निकाली जाती है, अगर रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है तो क्या करना चाहिए, कितना शुल्क लगता है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

केवाला (Registry Deed) क्या होता है?

केवाला यानी रजिस्ट्री डीड वह कानूनी दस्तावेज होता है, जिससे यह साबित होता है कि किसी जमीन की खरीद-बिक्री विधिवत हुई थी। इसमें खरीदार, विक्रेता, जमीन का पूरा विवरण, खाता, खेसरा, रकबा, गवाह और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सभी जानकारी दर्ज रहती है।

यही दस्तावेज आगे चलकर दाखिल-खारिज (Mutation), उत्तराधिकार, बैंक लोन, कोर्ट केस और जमीन के स्वामित्व के प्रमाण के रूप में काम आता है।

किन लोगों को यह सुविधा सबसे ज्यादा काम आएगी?

जिनके पास पुरानी रजिस्ट्री का कागज नहीं है।
जिनकी जमीन दादा या परदादा के नाम थी।
परिवार में कागजात किसी दूसरे रिश्तेदार के पास हैं।
जमीन विवाद चल रहा है।
दाखिल-खारिज या बंटवारा कराना है।
बैंक या कोर्ट में रजिस्ट्री की कॉपी जमा करनी है।

ऑनलाइन केवाला निकालने के लिए क्या चाहिए?

जरूरी जानकारी यदि उपलब्ध हो तो फायदा
जिला    ✔️
अंचल    ✔️
मौजा    ✔️
रजिस्ट्री का वर्ष    ✔️
केस नंबर सबसे ज्यादा उपयोगी
खाता नंबर उपयोगी
खेसरा नंबर उपयोगी
खरीदार या विक्रेता का नाम खोजने में मदद

ध्यान रहे, यदि सारी जानकारी नहीं भी है, तब भी कई मामलों में रिकॉर्ड खोजा जा सकता है। हालांकि समय थोड़ा ज्यादा लग सकता है।

बिहार में ऑनलाइन केवाला निकालने की प्रक्रिया

चरण 1: पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें
सबसे पहले बिहार सरकार के भू-अभिलेख (Bhu Abhilekh) पोर्टल पर जाएं।

यदि पहली बार उपयोग कर रहे हैं तो:

मोबाइल नंबर दर्ज करें।
OTP से सत्यापन करें।
यूजरनेम बनाएं।
जिला, अंचल, गांव, पोस्ट ऑफिस और पिनकोड भरें।
रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
इसके बाद मोबाइल नंबर और OTP की सहायता से लॉगिन किया जा सकता है।

चरण 2: सही दस्तावेज का चयन करें
लॉगिन करने के बाद दस्तावेज़ प्रकार (Document Type) में जाकर संबंधित नांतरण/भू-अभिलेख श्रेणी का चयन करें, जहां पुराने रजिस्ट्री रिकॉर्ड उपलब्ध रहते हैं।

फिर:

जिला चुनें।
अंचल चुनें।
मौजा चुनें।
यदि उपलब्ध हो तो केस नंबर, खाता या खेसरा नंबर भरें।
इसके बाद Search पर क्लिक करें।

चरण 3: उपलब्ध रिकॉर्ड देखें
यदि रिकॉर्ड पहले से स्कैन है, तो आपके सामने PDF की सूची दिखाई देगी।

इन PDF में:

एक या एक से अधिक रजिस्ट्री हो सकती हैं।

सभी पेज देखकर सही रिकॉर्ड पहचानना होगा।
पुरानी हस्तलिखित रजिस्ट्री भी मिल सकती है।

यदि रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं मिले तो क्या करें?

कई पुराने रिकॉर्ड अभी तक स्कैन नहीं हुए हैं।

ऐसी स्थिति में पोर्टल पर उपलब्ध रिक्वेस्ट (Request for Scanning) विकल्प का उपयोग किया जा सकता है।

इसके लिए सामान्यतः निम्न जानकारी मांगी जाती है-

रजिस्ट्री वर्ष
केस नंबर
पार्टी का नाम
खाता संख्या
खेसरा संख्या
आवश्यक टिप्पणी
यदि रिकॉर्ड अभिलेखागार में उपलब्ध होगा तो संबंधित विभाग उसे स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर सकता है।

डाउनलोड करने का शुल्क कितना है?

बिहार सरकार के वर्तमान पोर्टल पर सामान्यतः

                     सेवा                        शुल्क
प्रति पेज कॉपी ₹10
सर्विस चार्ज अलग से लागू
ऑनलाइन भुगतान UPI, Net Banking, Debit Card आदि

यदि आपने 5 पेज चुने हैं तो प्रति पेज शुल्क के अनुसार भुगतान करना होगा। सर्विस चार्ज अलग रहता है।

क्या तुरंत डाउनलोड मिल जाता है?

नहीं।

भुगतान करने के बाद आवेदन संबंधित कार्यालय में जाता है।

यदि डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) की आवश्यकता है, तो संबंधित अधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद दस्तावेज उपलब्ध कराया जाता है।

कुछ मामलों में कुछ घंटे लग सकते हैं, जबकि कई मामलों में 1–3 कार्य दिवस भी लग सकते हैं।

आवेदन की स्थिति कैसे देखें?

लॉगिन करने के बाद Dashboard में जाकर:

Pending
Approved
Rejected
की स्थिति देख सकते हैं।

Approved होने पर वहीं से प्रमाणित कॉपी डाउनलोड की जा सकती है।

अगर रिकॉर्ड बहुत पुराना हो तो?

कई बार 40–60 साल पुराने दस्तावेज पूरी तरह डिजिटल नहीं होते।

ऐसी स्थिति में:

जिला निबंधन कार्यालय (Sub-Registrar Office)
जिला अभिलेखागार
संबंधित निबंधन कार्यालय
में उपलब्ध मूल रिकॉर्ड के आधार पर कॉपी जारी की जा सकती है।

यदि रिकॉर्ड सुरक्षित है, तो उसके स्कैन होने के बाद भविष्य में ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

नए नियम और जरूरी जानकारी

बिहार सरकार लगातार भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण कर रही है ताकि लोगों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।

महत्वपूर्ण बातें:

अधिकांश सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रमाणित डिजिटल कॉपी कई सरकारी कार्यों में मान्य होती है।
जमीन खरीदने से पहले पुराने केवाला और वर्तमान खतियान का मिलान जरूर करें।
दाखिल-खारिज की स्थिति अलग से जांचना भी जरूरी है।
केवल रजिस्ट्री होना ही स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता, इसलिए म्यूटेशन और राजस्व रिकॉर्ड भी जांचें।

जरूरी सरकारी वेबसाइट

भूमि से जुड़ी सेवाओं के लिए इन सरकारी पोर्टलों का उपयोग करें

                    सेवा                  वेबसाइट
बिहार भूमि https://biharbhumi.bihar.gov.in
भू – अभिलेख https://biharbhumi.bihar.gov.in
निबंधन विभाग https://registration.bihar.gov.in

 

हमेशा केवल सरकारी वेबसाइट का ही उपयोग करें। किसी निजी वेबसाइट पर शुल्क देकर दस्तावेज निकलवाने से पहले पूरी जांच कर लें।

ध्यान रखने योग्य बातें

रिकॉर्ड खोजते समय सही जिला और अंचल चुनें।
पुराने समय में कई जिलों की प्रशासनिक सीमाएं बदली हैं, इसलिए रजिस्ट्री जिस समय हुई थी, उस कार्यालय की जानकारी जरूर रखें।
यदि केस नंबर पता हो तो रिकॉर्ड जल्दी मिल जाता है।
PDF में कई लोगों की रजिस्ट्री हो सकती है, इसलिए हर पेज ध्यान से देखें।
किसी अन्य व्यक्ति की निजी जानकारी का गलत उपयोग करना कानूनन अपराध हो सकता है।

समाधान

अगर आपके दादा, परदादा या परिवार के किसी सदस्य की पुरानी जमीन का केवाला गुम हो गया है, तो अब उसे दोबारा प्राप्त करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। बिहार सरकार के डिजिटल भू-अभिलेख पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड से आप प्रमाणित कॉपी प्राप्त कर सकते हैं। यदि रिकॉर्ड अभी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, तो उसे स्कैन कराने के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

हालांकि, जमीन से जुड़े किसी बड़े विवाद, उत्तराधिकार, बंटवारा या न्यायालयी मामले में केवल ऑनलाइन कॉपी पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित निबंधन कार्यालय या राजस्व विभाग से प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त करना अधिक सुरक्षित माना जाता है। इससे भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी की संभावना काफी कम हो जाती है।

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